Deep Fake टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल आजकल साइबर अपराधियों के लिए सबसे प्रभावी हथियार बन गया है। जहां एक ओर इस तकनीक का उपयोग मनोरंजन और रचनात्मक कार्यों के लिए किया जा सकता है, वहीं दूसरी ओर इसे धोखाधड़ी और वित्तीय अपराधों के लिए भी तेजी से इस्तेमाल किया जा रहा है। Deep Fake के जरिए किसी व्यक्ति की आवाज और हाव-भाव को हूबहू कॉपी करके फर्जीवाड़ा किया जाता है। अब तक यह आम लोगों के साथ ही हो रहा था, लेकिन हाल ही में भारत के प्रमुख उद्योगपति सुनील भारती मित्तल भी इसका शिकार होने से बाल-बाल बचे।
क्या है Deep Fake?
Deep Fake एक ऐसी उन्नत तकनीक है जिसमें किसी व्यक्ति की आवाज, चेहरे और बोलने के अंदाज को बेहद सटीक तरीके से नकली रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है। इस तकनीक का उपयोग कर साइबर अपराधी किसी भी व्यक्ति की पहचान को नकल कर उसे धोखा देने की कोशिश करते हैं।
Sunil Bharti Mittal के साथ क्या हुआ?
भारतीय एंटरप्राइजेज के संस्थापक और चेयरपर्सन Sunil Bharti Mittal ने हाल ही में एक कार्यक्रम में इस घटना का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उनके दुबई ऑफिस में अफ्रीका बिजनेस को संभालने वाले एक वरिष्ठ अधिकारी को उनके नाम से एक कॉल आया। इस कॉल में उस अधिकारी को बताया गया कि सुनील मित्तल एक इमरजेंसी में हैं और उन्हें तुरंत एक बड़ी राशि ट्रांसफर करनी होगी।
कैसे बचा कंपनी का बड़ा नुकसान?
कॉल करने वाले की आवाज और बोलने का तरीका बिल्कुल सुनील मित्तल जैसा था, लेकिन अनुभवी अधिकारी ने इस बात को पहचाना कि सुनील मित्तल कभी भी फोन करके इस तरह की मांग नहीं करते। उन्होंने तुरंत पैसे ट्रांसफर करने से मना कर दिया और सुनील मित्तल को सीधे उनके पर्सनल फोन पर संपर्क किया। जब मित्तल ने उस कॉल की रिकॉर्डिंग सुनी, तो वह चौंक गए क्योंकि आवाज और अंदाज बिल्कुल उनके जैसे थे।
Deep Fake से बचने के लिए सतर्कता जरूरी
इस घटना के बाद सुनील मित्तल ने बताया कि यदि वह अधिकारी थोड़ा भी कम अनुभवी होता, तो वह पैसे ट्रांसफर कर देता और इससे कंपनी को भारी नुकसान हो सकता था। मित्तल ने यह भी कहा कि आजकल Deep Fake से केवल आवाज की नकल करके ही धोखाधड़ी नहीं की जा रही, बल्कि भविष्य में डिजिटल साइन और वीडियो कॉल्स के जरिए भी ठगी की जा सकती है।
AI के बढ़ते खतरे
Sunil Bharti Mittal ने इस घटना से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि हमें अब पहले से ज्यादा सतर्क रहना होगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल के फायदे तो हैं, लेकिन इसके नुकसान भी काफी बढ़ सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जो कंपनियां AI को नहीं अपनाएंगी, वे पीछे रह जाएंगी। हालांकि, AI का इस्तेमाल करने में हमें इसके दुष्परिणामों से भी सावधान रहना होगा।
कैसे बचें Deep Fake से?
- सतर्कता: किसी भी अज्ञात कॉल या संदेश से सतर्क रहें, खासकर जब उसमें वित्तीय लेन-देन की बात हो।
- प्रामाणिकता की जांच: पैसे ट्रांसफर करने से पहले व्यक्ति की प्रामाणिकता की पूरी जांच करें।
- डिजिटल सुरक्षा: डिजिटल हस्ताक्षरों और अन्य संवेदनशील जानकारी को सुरक्षित रखने के लिए उन्नत साइबर सुरक्षा उपायों का पालन करें।
- AI की समझ: कंपनियों और व्यक्तियों को AI की तकनीकी समझ बढ़ानी होगी ताकि वे इसे प्रभावी तरीके से उपयोग कर सकें और इससे होने वाले खतरों से भी बच सकें।
निष्कर्ष
Deep Fake जैसे नए तकनीकी खतरों से बचने के लिए सतर्कता, डिजिटल सुरक्षा और AI के प्रति जागरूकता बेहद जरूरी है। सुनील भारती मित्तल का यह अनुभव हमें यह सिखाता है कि कैसे धोखेबाज इस तकनीक का इस्तेमाल कर किसी भी बड़े व्यक्ति या कंपनी को निशाना बना सकते हैं। हमें इस बदलती दुनिया में न केवल AI की अच्छाइयों का लाभ उठाना चाहिए, बल्कि इसके खतरों से भी बचने के लिए तत्पर रहना चाहिए।
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डिस्क्लेमर: स्टॉक मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन हैं। कृपया निवेश करने से पहले खुद की रिसर्च करें या फिर अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें और उसके अनुसार ही निर्णय लें। इस आर्टिकल में दी गई सूचनाओं का उद्देश्य आम जनों के साथ निवेशकों और ट्रेडर्स को जागरूक करना और उनकी जानकारी में वृद्धि करना है।
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