US-China Trade War: दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक जंग (Trade War) एक बार फिर तेज हो गई है। ट्रंप प्रशासन द्वारा चीन पर लगाए गए भारी शुल्क (Tariff Hike) के जवाब में अब चीन ने भी अमेरिकी प्रोडक्ट्स पर 34% तक का नया टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया है।
यह कदम वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain), निवेश धारणा (Investor Sentiment) और अंतरराष्ट्रीय व्यापार संतुलन (Trade Balance) को हिला सकता है। चलिए जानते हैं इस तनाव की पूरी कहानी और इसके संभावित असर।
चीन का पलटवार: 34% Tariff से जताया विरोध
चीन के Finance Ministry ने साफ शब्दों में कहा है कि वह अमेरिका के “अनुचित और अन्यायपूर्ण” टैरिफ निर्णयों का पुरजोर विरोध करता है। 10 अप्रैल 2025 से लागू होने वाला यह 34% Tariff, ट्रंप के उस ऐलान का जवाब है जिसमें अमेरिका ने चीनी वस्तुओं पर पहले ही 20% और फिर 34% टैरिफ लगाया था।
चीन के Commerce Ministry ने कहा:
“हम अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएंगे।”
ट्रंप का अगला दांव: De Minimis Rule भी खत्म
ट्रंप प्रशासन ने न सिर्फ टैरिफ बढ़ाया, बल्कि De Minimis Rule को भी खत्म कर दिया। इस नियम के तहत चीन और हांगकांग से सस्ते सामान अमेरिकी कस्टम ड्यूटी से छूट प्राप्त कर सकते थे। अब यह सुविधा नहीं मिलने से e-commerce platforms और छोटे व्यापारियों की लागत बढ़ेगी।
Global Trade Deal पर खतरा
2020 में अमेरिका और चीन ने Phase-1 Trade Deal साइन की थी, जिसके तहत चीन को अमेरिकी वस्तुओं की खरीद 200 अरब डॉलर तक बढ़ानी थी। हालांकि चीन ने इसे कभी पूरा नहीं किया।
अब टैरिफ युद्ध के चलते यह समझौता पूरी तरह टूट सकता है, जिससे global trade confidence को झटका लग सकता है।
टैरिफ वॉर का संभावित असर
क्षेत्र | संभावित प्रभाव |
---|---|
Global Supply Chain | लागत और डिलीवरी टाइम बढ़ेगा |
Inflation | कई वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी संभव |
Stock Market | Short-term volatility देखने को मिल सकती है |
Investor Confidence | FDI और Portfolio Investment पर असर |
अमेरिका बनाम चीन: व्यापार डेटा
- 2017 में चीन ने US से $154 अरब की वस्तुएं आयात की थीं।
- 2024 में यह आंकड़ा $164 अरब तक पहुंचा।
यानी, व्यापार जारी है, लेकिन तनाव भी बना हुआ है।
आगे क्या हो सकता है?
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर दोनों देश टैरिफ वॉर को और बढ़ाते हैं, तो यह सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि Geo-Political Tension का कारण भी बन सकता है। अमेरिका की ओर से चुनावी वादों के तहत 60% टैरिफ तक जाने की आशंका जताई जा रही है।
निष्कर्ष
US-China Trade War अब केवल व्यापार की लड़ाई नहीं रह गई है, यह Supply Chain Reorientation, Global Inflation और Diplomatic Strategies को भी प्रभावित कर रही है। भारत जैसे देश के लिए यह मौका भी है कि वो अमेरिका के साथ अपने Trade Relations को और मजबूत करे।
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FAQs
1. ट्रंप के टैरिफ बढ़ाने से सबसे ज्यादा असर किन सेक्टर्स पर पड़ेगा?
सबसे ज्यादा असर Electronics, Automobile, और Retail सेक्टर्स पर पड़ेगा, क्योंकि ये चीन से भारी मात्रा में कच्चा माल और उत्पाद आयात करते हैं।
2. De Minimis Rule क्या है और इसके हटने से क्या असर होगा?
De Minimis Rule के तहत सीमित मूल्य के उत्पाद बिना कस्टम ड्यूटी के अमेरिका में भेजे जा सकते थे। इसके हटने से E-commerce platforms और कंज्यूमर्स को अतिरिक्त खर्च करना होगा।
3. भारत को इस टैरिफ वॉर से क्या फायदा हो सकता है?
भारत, China Plus One Strategy के तहत एक वैकल्पिक मैन्युफैक्चरिंग हब बन सकता है। अमेरिका से बेहतर टैरिफ रिलेशन के चलते भारत को Export Opportunities मिल सकती हैं।
डिस्क्लेमर: स्टॉक मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन हैं। कृपया निवेश करने से पहले खुद की रिसर्च करें या फिर अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें और उसके अनुसार ही निर्णय लें। इस आर्टिकल में दी गई सूचनाओं का उद्देश्य आम जनों के साथ निवेशकों और ट्रेडर्स को जागरूक करना और उनकी जानकारी में वृद्धि करना है।

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